श्रीमद्भगवद्गीता कथा के समापन दिवस पर कथावाचक पं. मनमोहन शास्त्री का भव्य अभिनंदन, श्रद्धालु हुए भावविभोर
![]() |
सद्दाम रंगरेज, प्रधान संपादक | Sun, 19-Apr-2026 |
|---|
कुचामनसिटी(नागौर डेली न्यूज)। डीडवाना रोड स्थित श्रवणपुरा काला भाटा की ढाणी में आयोजित संगीतमय सप्तदिवसीय श्रीमद्भगवद्गीता कथा के समापन दिवस पर आध्यात्मिकता, भक्ति और संस्कारों का अद्भुत संगम देखने को मिला। कथा के सप्तम दिवस पर गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति भारत की कुचामन इकाई द्वारा कथावाचक पं. मनमोहन शास्त्री का श्रद्धा, सम्मान और भक्ति भाव के साथ भव्य अभिनंदन किया गया।
कार्यक्रम के दौरान संगीतमय प्रस्तुति और गीता के गूढ़ ज्ञान ने उपस्थित श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। पूरा वातावरण भक्ति रस से सराबोर रहा, जहां श्रद्धालु भावविभोर होकर कथा का रसास्वादन करते नजर आए। कुचामन इकाई के अध्यक्ष सत्यप्रकाश शर्मा ने जानकारी देते हुए बताया कि समिति के पदाधिकारियों द्वारा पं. मनमोहन शास्त्री का शाल, माला, दुपट्टा एवं समिति का स्मृति चिह्न “है नाथ मैं आपको भूलूं नहीं” तथा संस्था की जानकारी का फोल्डर भेंट कर सम्मान किया गया। इस अवसर पर उपस्थित श्रद्धालुओं ने गीता के संदेशों को अपने जीवन में अपनाने का संकल्प लिया ।
समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर तिवाड़ी ने अपने उद्बोधन में बताया कि ब्रह्मलीन संत रामसुखदास महाराज की प्रेरणा से स्थापित समिति निरंतर सनातन संस्कृति के संवर्धन, गर्भस्थ शिशु संरक्षण एवं श्रेष्ठ संस्कारों के प्रसार हेतु कार्य कर रही है। उन्होंने भ्रूण हत्या को महापाप बताते हुए कहा कि यह सामाजिक असंतुलन का प्रमुख कारण है, जिसके दुष्परिणाम वैश्विक स्तर पर चिंताजनक हैं।
कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्यामसुंदर मंत्री ने कहा कि भारतीय संस्कृति के संरक्षण हेतु “बेटी बचाओ, बेटी के जन्म पर उत्सव मनाओ, बेटी को समय पर परणाओ तथा बहू को पढ़ाओं ” जैसे जनजागरण अभियानों की अत्यंत आवश्यकता है। कार्यक्रम में समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष रामकिशोर तिवाड़ी, कार्यकारी राष्ट्रीय अध्यक्ष श्यामसुंदर मंत्री, कुचामन इकाई अध्यक्ष सत्यप्रकाश शर्मा, उपाध्यक्ष मुरलीधर गोयल, शिक्षाविद् मधुसूदन पारीक, रूपसिंह राजपुरोहित, जयराम सहित अनेक साधक एवं श्रद्धालुजन उपस्थित रहे। कार्यक्रम का समापन भक्तिमय वातावरण में हुआ, जहां सभी श्रद्धालुओं ने श्रीमद्भगवद्गीता के संदेशों को अपने जीवन में आत्मसात करने का संकल्प लिया।