कुचामन : बिना दहेज के ‘सत्य शोधक विवाह’ सम्पन्न, सादगीपूर्ण तरीके से रचा गया विवाह
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सद्दाम रंगरेज, प्रधान संपादक | Thu, 30-Apr-2026 |
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कुचामनसिटी(नागौर डेली न्यूज)। राष्ट्रपिता ज्योतिराव फुले द्वारा स्थापित सत्य शोधक समाज की परंपराओं के अनुसार कुचामन सिटी में एक सादगीपूर्ण और बिना दहेज का “सत्य शोधक विवाह” संपन्न हुआ। यह विवाह 27 अप्रैल, सोमवार को गोदावरी गार्डन, कुचामन सिटी में आयोजित किया गया, जिसमें सामाजिक समानता और कुरीतियों के विरोध का संदेश दिया गया। कुचामन निवासी माया (पत्नी स्व. रविप्रकाश) की सुपुत्री भावना लखन का विवाह महाराष्ट्र के लातुर निवासी शोभा (पत्नी अंकुश) के सुपुत्र सुदर्शन कस्बे के साथ संपन्न हुआ।
महापुरुषों के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलन से हुई शुरुआत
विवाह समारोह की शुरुआत भगवान बुद्ध की प्रतिमा एवं बहुजन समाज के महापुरुषों—ज्योतिराव फुले, सावित्रीबाई फुले, डॉ. भीमराव अंबेडकर, माता रमाबाई और अन्नाभाऊ साठे के चित्रों के समक्ष दीप प्रज्वलित कर की गई। इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने इन महान विभूतियों के आदर्शों को स्मरण करते हुए सामाजिक सुधार और समानता के संदेश को आत्मसात करने का संकल्प लिया।
मंगलाष्टिका और प्रतिज्ञाओं के साथ सम्पन्न हुआ विवाह
महाराष्ट्र अंधश्रद्धा निर्मूलन समिति की ओर से डॉ. सोमनाथ कदम और प्रोफेसर सुचिता गायकवाड़ कदम ने सत्य शोधक समाज की परंपरा के अनुसार विवाह संपन्न कराया। कार्यक्रम की शुरुआत मंगलाष्टिका (मंगल गीत) से हुई, जिसके बाद वर और वधू को समानता, सम्मान और जिम्मेदारी से जुड़े संकल्प दिलवाए गए। इसके पश्चात पहले वधू ने वर को और फिर वर ने वधू को वरमाला पहनाई। पूरे समारोह में किसी प्रकार की दिखावेबाजी या दहेज का लेन-देन नहीं किया गया, जिससे यह विवाह एक प्रेरणादायक उदाहरण बन गया।
सादगीपूर्ण माहौल में सम्पन्न हुआ विवाह, दिया सामाजिक संदेश
समारोह में उपस्थित लोगों ने पुष्प वर्षा कर नवदंपति को आशीर्वाद दिया। विवाह पूरी तरह सादगीपूर्ण वातावरण में संपन्न हुआ, जिसने समाज में दहेज प्रथा और आडंबर के खिलाफ सकारात्मक संदेश दिया। यह सत्य शोधक विवाह न केवल एक सामाजिक आयोजन रहा, बल्कि समानता, शिक्षा और प्रगतिशील सोच को बढ़ावा देने की दिशा में एक सराहनीय पहल के रूप में सामने आया।