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दक्षिण भारत की ट्रेनों का ठहराव कुचामनसिटी में देने की मॉंग

सद्दाम रंगरेज, प्रधान संपादक Tue, 17-Mar-2026

कुचामनसिटी(नागौर डेली न्यूज) : जोधपुर–जयपुर रेल मार्ग पर स्थित प्रमुख स्टेशन कुचामन सिटी पर दक्षिण भारत जाने वाली महत्वपूर्ण ट्रेनों के ठहराव की मांग एक बार फिर तेज हो गई है। क्षेत्र के नागरिकों और सामाजिक संगठनों का कहना है कि कुचामन राजस्थान में शिक्षा और सैनिक तैयारी के क्षेत्र में अपनी विशिष्ट पहचान रखता है तथा यहां से बड़ी संख्या में लोग रोजगार और उच्च शिक्षा के लिए दक्षिण भारत के विभिन्न राज्यों में प्रवास करते हैं।

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इसके बावजूद इस मार्ग से गुजरने वाली कई लंबी दूरी की ट्रेनों का कुचामन सिटी स्टेशन पर ठहराव नहीं होने से यात्रियों को अन्य स्टेशनों से यात्रा करने के लिए मजबूर होना पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि क्षेत्र की जनता और विभिन्न सामाजिक संस्थाओं द्वारा लगातार जोधपुर मंडल के अधिकारियों तथा जनप्रतिनिधियों से कुचामनसिटी स्टेशन पर इन ट्रेनों के ठहराव की मांग की जाती रही है। 

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इस संबंध में स्थानीय विधायक, सांसद तथा केन्द्रीय मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत भी रेल मंत्री को पत्र लिखकर कुचामन में ठहराव की मांग कर चुके हैं, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं होने से क्षेत्र में असंतोष देखा जा रहा है। कुचामन सिटी स्टेशन पर मुख्य रूप से जिन ट्रेनों के ठहराव की मांग की जा रही है, उनमें 22673/22674 भगत की कोठी–मन्नारगुड़ी, 20471/20472 श्रीगंगानगर–पुरी, 20813/20814 जोधपुर–पुरी, 22631/22632 बीकानेर–मदुरई तथा 20481/20482 भगत की कोठी–तिरुचिरापल्ली शामिल हैं। इन ट्रेनों का संचालन इस रेल मार्ग से होता है, लेकिन कुचामन सिटी स्टेशन पर इनका ठहराव नहीं होने से क्षेत्रीय यात्रियों को सीधी सुविधा नहीं मिल पा रही है।

रेलवे के नियमों के अनुसार किसी भी ट्रेन के ठहराव के लिए न्यूनतम 16,674 रुपये प्रतिदिन प्रति ट्रेन आय का मानक निर्धारित किया गया है। जोधपुर मंडल द्वारा 31 मार्च 2025 को रेलवे बोर्ड को भेजे गए प्रस्ताव के अनुसार कुचामन सिटी स्टेशन से प्रति ट्रेन प्रतिदिन लगभग 18,721 रुपये की आय प्राप्त हो रही है, जो निर्धारित मानक से अधिक है।
 
आंकड़ों के अनुसार वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2024 से 31 मार्च 2025 के दौरान कुचामन सिटी स्टेशन से रेलवे को लगभग 8 करोड़ 74 लाख रुपये की आय प्राप्त हुई थी। वहीं वर्तमान वित्तीय वर्ष 1 अप्रैल 2025 से 31 जनवरी 2026 तक केवल 10 महीनों में ही यह आय 7 करोड़ 96 लाख रुपये तक पहुंच चुकी है। अनुमान है कि वित्तीय वर्ष समाप्त होते-होते यह आय लगभग 9 करोड़ 50 लाख रुपये के आसपास पहुंच सकती है।
 
स्थानीय लोगों का कहना है कि रेलवे मंत्रालय ने कई ऐसे स्टेशनों पर भी ट्रेनों के ठहराव स्वीकृत किए हैं, जहां से आय रेलवे के निर्धारित मानकों से कम है। ऐसे में कुचामन सिटी जैसे स्टेशन, जो आय के मानकों को पूरा कर रहा है और जहां से लगातार मांग उठ रही है, वहां ठहराव नहीं दिया जाना समझ से परे बताया जा रहा है।
 
क्षेत्रवासियों ने रेलवे मंत्रालय से मांग की है कि कुचामन सिटी स्टेशन की आय, यात्री संख्या और क्षेत्रीय आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए दक्षिण भारत की प्रमुख ट्रेनों का ठहराव शीघ्र स्वीकृत किया जाए, ताकि कुचामन और आसपास के क्षेत्रों के यात्रियों को सीधी रेल सुविधा मिल सके।
 
 
 
 
 
 
 
 

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