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UGC के नए नियमों के खिलाफ़ प्रधानमंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन

शौकत खान Thu, 29-Jan-2026

डेगाना(नागौर डेली न्यूज) केन्द्र सरकार द्वारा UGC का प्रस्तावित नए नियमों को लेकर क्षेत्र में असंतोष गहराता जा रहा है। इसी क्रम में डेगाना क्षेत्र के नागरिकों एवं विद्यार्थियों ने दौलत सिंह शेखावत युवा मोर्चा अध्यक्ष के नेतृत्व में प्रधानमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन उपखंड अधिकारी, डेगाना के माध्यम से सौंपा। ज्ञापन में UGC के नए नियमों को भारतीय संविधान की मूल भावना के विपरीत बताते हुए उन्हें तत्काल प्रभाव से स्थगित करने की मांग की गई है। 

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ज्ञापन में कहा गया है कि प्रस्तावित UGC नियम संविधान के अनुच्छेद 14, 15, 16, 19 और 21 में निहित समानता, सामाजिक न्याय, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता एवं प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं हैं। इससे न केवल शैक्षणिक व्यवस्था प्रभावित होगी, बल्कि सामाजिक संतुलन एवं विधिक प्रक्रिया पर भी गंभीर दुष्प्रभाव पड़ सकता है। ज्ञापन के अनुसार नए नियम लागू होने की स्थिति में अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के विद्यार्थियों द्वारा सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों, शिक्षकों अथवा शैक्षणिक प्रशासन के विरुद्ध बड़ी संख्या में मुकदमे, शिकायतें एवं रिट याचिकाएं दायर होने की संभावना है, जिससे विश्वविद्यालयों का शैक्षणिक वातावरण प्रभावित होगा और संस्थान न्यायालयीन विवादों में उलझ सकते हैं। 

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इसके साथ ही ज्ञापन में यह भी उल्लेख किया गया कि नए नियम अकादमिक निर्णयों को कानूनी एवं प्रशासनिक हस्तक्षेप के अधीन कर देंगे, जिससे शिक्षा का उद्देश्य ज्ञान-विकास से हटकर विवाद-निपटान तक सीमित हो सकता है। यह स्थिति न तो वंचित वर्ग के वास्तविक सशक्तिकरण के हित में है और न ही सामान्य वर्ग के अधिकारों के अनुरूप।

ज्ञापन में यह भी आरोप लगाया गया कि नए UGC नियम विश्वविद्यालयों की स्वायत्तता को सीमित करते हैं, राज्य सरकारों के अधिकार क्षेत्र में अनावश्यक हस्तक्षेप करते हैं तथा शिक्षा क्षेत्र में अत्यधिक केंद्रीकरण को बढ़ावा देते हैं, जो संघीय ढांचे और राष्ट्रीय एकता की भावना के विपरीत है। अंत में प्रधानमंत्री से मांग की गई कि नए UGC नियमों को तत्काल प्रभाव से स्थगित किया जाए। इनके संवैधानिक, विधिक एवं सामाजिक प्रभावों का पुनर्मूल्यांकन कराया जाए,

एक संतुलित, स्पष्ट एवं न्यायसंगत नियामक ढांचा तैयार किया जाए, जिससे अनुसूचित जाति/जनजाति वर्ग के अधिकारों की सुरक्षा के साथ-साथ सामान्य वर्ग के संवैधानिक अधिकारों का भी संरक्षण सुनिश्चित हो। ज्ञापन में यह भी चेतावनी दी गई कि यदि समय रहते इन नियमों पर पुनर्विचार नहीं किया गया, तो इससे सामाजिक असंतोष बढ़ सकता है, जिसकी जिम्मेदारी शासन-प्रशासन की होगी। इस अवसर पर कुशाल सिंह ओडिट, दातार सिंह, गजेन्द्र सिंह भरपाई,ओंकार सिंह सिंगड, श्रवण सिंह रोहिणा, जितेंद्र सिंह मांझी, रविन्द्र सिंह जालसू, शोभाग सिंह झगड़वास, सुनील सिंह शूटर, भंवर सिंह पुनियास, चंदन सिंह इंदा, सुरेंद्र सिंह, युवराज सिंह गुढ़ा उपस्थित रहे।


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