विज्ञापन

लोकपाल के माध्यम से सरकार सहित अन्य संगठनों के विरूद्ध शिकायत की जांच का अधिकार : झाला

सद्दाम रंगरेज, प्रधान संपादक Wed, 30-Jul-2025
कुचामनसिटी(नागौर डेली न्यूज) : राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण अरूण कुमार बेरीवाल के निर्देश में अध्यक्ष तालुका विधिक सेवा समिति सुन्दर लाल खारोल के आदेशानुसार तालुका विधिक सेवा समिति, कुचामन का अधिकार मित्र अशोक कुमार झाला द्वारा कुचामन की रेगर बस्ती में विधिक जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम को संबोधित करते हुए झाला ने कहा कि लोकपाल सरकार सहित व्यवसायों और अन्य संगठनों के विरूद्ध की गई शिकायतों की जांच करता है। क्षेत्राधिकार के आधार पर लोकपाल का निर्णय कानूनी रूप से बाध्यकारी हो भी सकता है। 
विज्ञापन
लोकपाल एवं लोकायुक्त अधिनियम, 2013 में यह प्रावधान किया गया है कि लोक पदाधिकारियों के खिलाफ भ्रष्टाचार से संबंधित शिकायतों का निवारण किया जायेगा। समस्त सरकारी संस्थाओं में जहां पर भ्रष्टाचार फैला हुआ उसके विरूद्ध हमें लोकपाल अधिनियम के अन्तर्गत शिकायत दर्ज करवानी चाहिए। प्रत्येक राज्य द्वारा पारित कानून के माध्यम से लोकायुक्त की स्थापना की गई है, जिसका प्रमुख उद्देश्य से सरकारी एवं अन्य संगठनों में व्याप्त भ्रष्टाचार को खत्म करना है। इस अवसर आमजन के मध्य लघु विडियो फिल्म के द्वारा भी जागरूक किया गया।  
विज्ञापन

इसी क्रम में आमजन को जागरूक करते हुए कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली ने अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के विरूद्ध अस्पृश्यता और अत्याचार के अपराधों पर अंकुश लगाने तथा पी.सी.आर अधिनियम, 1955 और एस.सी/एस.टी. अधिनियम, 1989 के तहत हमारे समाज में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के खिलाफ अत्याचारों को रोकने के लिए बनाये गए कानून है। इसका मुख्य उद्देश्य इन हाशिए पर स्थित समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उनके खिलाफ होने वाले भेदभाव और हिंसा को रोकना है। 

हमारे संविधान के अनुच्छेद 15 एवं 17 में निहित इस अधिनियम का उद्देश्य इन हाशिये पर स्थित समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पिछले कानूनों की अपर्याप्तता को दूर करना है। उक्त अधिनियम में त्वरित सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना और अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए विरिष्ठ पुलिस अधिकारियें के नेतृत्व में राज्य स्तर पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति संरक्षण प्रकोष्ठों की स्थापना का आदेश दिया गया है। उक्त अधिनियम के तहत अपराधों की जांच पुलिस उपाधीक्षक के पद से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जाती है एवं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाती है। उक्त अधिनियम के तहत ऐसे पीडितों को राहत और पुनर्वास प्रदान करने का प्रावधान है, जिसके तहत वितीय मुआवजा, कानूनी सहायता और सहायक सेवाएं दी जाती है।
 


विज्ञापन
( Connecting with social media platform )
App | E-paper   | Facebook   | Youtube
( पर फ़ॉलो भी कर सकते है )

( नागौर डेली की लेटेस्ट न्यूज़ अपने व्हात्सप्प पे प्राप्त करने के लिए ग्रुप ज्वाइन करे )
Click to join Group

Latest News