लोकपाल के माध्यम से सरकार सहित अन्य संगठनों के विरूद्ध शिकायत की जांच का अधिकार : झाला
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सद्दाम रंगरेज, प्रधान संपादक | Wed, 30-Jul-2025 |
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इसी क्रम में आमजन को जागरूक करते हुए कहा कि राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण, नई दिल्ली ने अनुसूचित जाति एवं जनजातियों के विरूद्ध अस्पृश्यता और अत्याचार के अपराधों पर अंकुश लगाने तथा पी.सी.आर अधिनियम, 1955 और एस.सी/एस.टी. अधिनियम, 1989 के तहत हमारे समाज में अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के सदस्यों के खिलाफ अत्याचारों को रोकने के लिए बनाये गए कानून है। इसका मुख्य उद्देश्य इन हाशिए पर स्थित समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उनके खिलाफ होने वाले भेदभाव और हिंसा को रोकना है।
हमारे संविधान के अनुच्छेद 15 एवं 17 में निहित इस अधिनियम का उद्देश्य इन हाशिये पर स्थित समुदायों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और पिछले कानूनों की अपर्याप्तता को दूर करना है। उक्त अधिनियम में त्वरित सुनवाई के लिए विशेष न्यायालयों की स्थापना और अधिनियम के कार्यान्वयन की निगरानी के लिए विरिष्ठ पुलिस अधिकारियें के नेतृत्व में राज्य स्तर पर अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति संरक्षण प्रकोष्ठों की स्थापना का आदेश दिया गया है। उक्त अधिनियम के तहत अपराधों की जांच पुलिस उपाधीक्षक के पद से नीचे के अधिकारी द्वारा नहीं की जाती है एवं निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरी की जाती है। उक्त अधिनियम के तहत ऐसे पीडितों को राहत और पुनर्वास प्रदान करने का प्रावधान है, जिसके तहत वितीय मुआवजा, कानूनी सहायता और सहायक सेवाएं दी जाती है।