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प्रकृति के शायर खुश्तर मकरानवी का जन्मदिन सद्भावना दिवस के रूप में मनाया

मोहम्मद शहजाद Wed, 25-Feb-2026

​मकराना(नागौर डेली न्यूज) शहर का नाम देश-दुनिया में रोशन करने वाले प्रख्यात प्रकृति के शायर जनाब खुश्तर मकरानवी का जन्म दिवस शहर के माताभर स्थित अकलियत समाज भवन में सद्भावना दिवस के रूप में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। कार्यक्रम में साहित्यकारों ने उनके उर्दू साहित्य में योगदान को रेखांकित करते हुए उन्हें आध्यात्मिक रहस्यवाद का अनूठा शायर बताया।

 
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​​सद्भावना मंच के संयोजक देवेश स्वामी ने बताया कि कार्यक्रम में कुचामन और मकराना के ख्यातिप्राप्त साहित्यकारों ने शिरकत की। विद्वानों ने खुश्तर मकरानवी द्वारा रचित शेरो-शायरी, नज्म, गजल और रुबाइयों का गहन विश्लेषण किया। वक्ताओं ने उनके लेखन की बारीकियों को साझा करते हुए बताया कि किस तरह उनकी रचनाएं प्रकृति और आध्यात्म को आपस में जोड़ती हैं।
 
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​कार्यक्रम में साहित्य जगत की कई नामी हस्तियों ने विचार व्यक्त किए, जिनमें मुख्य रूप से शामिल थे। ​कुचामन से डॉ. दिलीप पारीक, दिलीप सिंह शेखावत, सुरेश वर्मा। ​विद्वान वक्ता: डॉ. अब्दुल रहमान रिंद, पं. कैलाश शर्मा, अब्दुल हमीद बेहलीम, शहादत अली सीए, दिलीप सिंह चौहान, हाजी गुलाम रसूल सिसोदिया और बाबूलाल विश्नोई। 

इस दौरान रिटायर्ड प्रिंसिपल अब्दुल वहीद खिलजी, अब्दुल गफूर चौहान, गयूर अहमद खत्री, छोटूराम बाजडोलीया, डी.पी. व्यास, रामदेव पारीक, अब्दुल कयूम भाटी, साजिद बल्खी, अब्दुल अजीज गहलोत, जेठाराम बणिया, अब्दुल मजीद खिलजी, एडवोकेट आरिफ भाटी, गय्यूर अहमद बलखी उपस्थित थे। ​कार्यक्रम का कुशल संचालन शिक्षाविद अब्दुल रऊफ ने किया। उन्होंने खुश्तर साहब के चुनिंदा कलाम और साहित्य को इस अंदाज में पेश किया कि उपस्थित श्रोता भाव-विभोर हो गए। वक्ताओं ने एकमत होकर कहा कि खुश्तर मकरानवी के विचार आज के दौर में सामाजिक समरसता और सद्भावना बढ़ाने के लिए अत्यंत प्रासंगिक हैं।


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