मारोठ : गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच गोबर की थप्पड़ियां बनीं सहारा, पर्यावरण और जेब दोनों को राहत
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हितेश रारा | Tue, 12-May-2026 |
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मारोठ(नागौर डेली न्यूज)। क्षेत्र में रसोई गैस सिलेंडरों की किल्लत और बढ़ती कीमतों के बीच अब ग्रामीण क्षेत्र के लोग पारंपरिक ईंधन की ओर लौटने लगे हैं। गांवों और कस्बों में गोबर से बनाई जाने वाली थप्पड़ियों (उपलों) का उपयोग फिर से बढ़ रहा है। खास बात यह है कि यह न केवल सस्ता विकल्प साबित हो रहा है, बल्कि पर्यावरण के लिए भी लाभदायक माना जा रहा है।
इन दिनों कई परिवार भोजन पकाने, पानी गर्म करने और अन्य घरेलू कार्यों में गोबर की थप्पड़ियों का उपयोग कर रहे हैं। ग्रामीण महिलाओं का कहना है कि गैस सिलेंडर समय पर नहीं मिलने और महंगे होने के कारण उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा था, ऐसे में गोबर के उपले काफी सहायक साबित हो रहे हैं।
विशेषज्ञों के अनुसार गोबर की थप्पड़ियां प्राकृतिक ईंधन हैं, जिनसे सीमित मात्रा में प्रदूषण होता है और खेतों के लिए राख भी उपयोगी रहती है। पशुपालक परिवारों को इससे अतिरिक्त आय का साधन भी मिल रहा है। कई जगह ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में भरकर गोबर की थप्पड़ियां बाजारों तक पहुंचाई जा रही हैं, जहां इनकी मांग लगातार बढ़ रही है।
ग्रामीणों का कहना है कि पुराने समय में लगभग हर घर में उपलों का उपयोग होता था, लेकिन गैस कनेक्शन बढ़ने के बाद यह परंपरा कम हो गई थी। अब परिस्थितियों के चलते एक बार फिर लोग पारंपरिक और किफायती साधनों को अपनाने लगे हैं।