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सेवा सेतु शिविर में नहीं पहुंचा एक भी परिवादी, विभागीय कर्मचारी करते रहे इंतजार

शौकत खान Sat, 19-Sep-2026

डेगाना(नागौर डेली न्यूज) आमजन की समस्याओं के त्वरित समाधान और विभिन्न सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र लोगों तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित “विकसित भारत-जन सेवा अभियान-2026” के तहत सेवा सेतु शिविर में अपेक्षित जनभागीदारी नहीं दिखाई दी। शिविर में एक भी परिवादी के नहीं पहुंचने से मौके पर मौजूद विभिन्न विभागों के अधिकारी-कर्मचारी खाली बैठे रहे।

सरकारी आदेश के अनुसार पंचायत समिति डेगाना में आयोजित इस शिविर में पंचायती राज विभाग के साथ राजस्व, ग्रामीण विकास, राजीविका, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य, पशुपालन, ऊर्जा, कृषि, सामाजिक न्याय, महिला एवं बाल विकास, शिक्षा, जलदाय, सार्वजनिक निर्माण, परिवहन सहित कई विभागों को अपने-अपने विभाग से संबंधित कार्यों का निस्तारण करना था।

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इन प्रमुख कामों का होना था निस्तारण
 
पंचायती राज विभाग को IHHL एवं सामुदायिक स्वच्छता परिसरों की स्वीकृति, निष्क्रिय परिसरों को चालू कराने, सोख्ता गड्ढे व मैजिक पिट की स्वीकृति, RRC केंद्रों को क्रियाशील करने तथा स्वच्छता संबंधी जानकारी देने के कार्य करने थे।
ग्रामीण विकास विभाग को प्रधानमंत्री आवास योजना ग्रामीण के लाभार्थियों की लंबित दूसरी व तीसरी किश्त जारी करने तथा डुप्लीकेट जॉब कार्डों का सत्यापन करना था।
 
राजस्व विभाग में खातों एवं अभिलेखों का शुद्धिकरण, आपसी सहमति से खातों का विभाजन, रास्ते व नामांतरण के प्रकरण, अतिक्रमण संबंधी मामले, भूमिहीन किसानों को भूमि आवंटन, सीमाज्ञान-पत्थरगढ़ी, मूल निवास व हैसियत प्रमाण-पत्र तथा फार्मर रजिस्ट्री जैसे कार्य शामिल थे।
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चिकित्सा विभाग को महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच, विभिन्न कैंसर एवं अन्य बीमारियों की स्क्रीनिंग, बच्चों का टीकाकरण, NCD स्क्रीनिंग, टीबी स्क्रीनिंग तथा पीएम-जय कार्ड बनाने का कार्य करना था। ऊर्जा विभाग को बिजली आपूर्ति, खराब मीटर, ट्रांसफॉर्मर, तार व खंभों की समस्याओं, बिजली बिल एवं मांगपत्र संबंधी शिकायतों का निस्तारण तथा पीएम-सूर्यघर योजना की जानकारी देनी थी।
 
इसी प्रकार खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग को राशन कार्ड से जुड़े लंबित मामलों, आधार सीडिंग, ई-केवाईसी और LPG ID मैपिंग का काम करना था। सामाजिक न्याय विभाग को सामाजिक सुरक्षा पेंशन सत्यापन, पालनहार योजना और UDID कार्ड संबंधी प्रकरणों का निस्तारण करना था।
महिला एवं बाल विकास विभाग को लाडली प्रोत्साहन, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ, महिला हेल्पलाइन, वन स्टॉप सेंटर, मातृत्व वंदना सहित विभिन्न योजनाओं से संबंधित कार्य करने थे। वहीं जलदाय विभाग को हैंडपंप मरम्मत, पेयजल गुणवत्ता की जांच, पाइपलाइन लीकेज एवं अन्य पेयजल शिकायतों का समाधान करना था।
 
इसके अलावा पशुपालन विभाग को पशु स्वास्थ्य शिविर व टीकाकरण, कृषि विभाग को योजनाओं की जानकारी व मृदा स्वास्थ्य कार्ड, शिक्षा विभाग को प्रवेश, छात्रवृत्ति व स्कूल भूमि से अतिक्रमण संबंधी कार्य, परिवहन विभाग को पात्र लोगों को रोडवेज पास तथा अन्य विभागों को भी अपने-अपने निर्धारित कार्यों का निस्तारण करना था।
 
प्रचार-प्रसार पर उठे सवाल
 
इतने व्यापक स्तर पर आमजन से जुड़े कार्य निर्धारित होने के बावजूद शिविर में एक भी परिवादी नहीं पहुंचना व्यवस्था और प्रचार-प्रसार पर सवाल खड़े करता है। स्थानीय स्तर पर यह भी चर्चा रही कि लोगों को शिविर की पर्याप्त जानकारी नहीं दी गई, जिसके कारण पात्र लोग अपनी समस्याएं लेकर शिविर तक नहीं पहुंच सके।
 
ऐसे में लाखों रुपये के सरकारी कार्यक्रमों की उपयोगिता को लेकर सवाल उठना स्वाभाविक है। हालांकि सरकारी धन के अपव्यय का अंतिम निष्कर्ष निकालने के लिए आयोजन पर हुए वास्तविक खर्च और विभागीय रिपोर्ट की जानकारी जरूरी होगी। अब सवाल यह है कि जब सरकारी आदेश में इतने बड़े पैमाने पर आमजन के कामों का शिविर में निस्तारण करने के निर्देश थे, तो एक भी परिवादी क्यों नहीं पहुंचा और इसके लिए प्रचार-प्रसार की क्या व्यवस्था की गई थी? प्रशासन की ओर से इस संबंध में स्पष्टीकरण और शिविर की विभागवार प्रगति रिपोर्ट सामने आने पर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।

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