मानसिक रूप से स्वस्थ रहना आज की सबसे बड़ी आवश्यकता : अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुंदरलाल खारोल
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सद्दाम रंगरेज, प्रधान संपादक | Fri, 07-Aug-2026 |
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कुचामनसिटी(नागौर डेली न्यूज)। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण, जयपुर के एक्शन प्लान के तहत ताल्लुका विधिक सेवा समिति एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायालय, कुचामन सिटी के तत्वावधान में बार संघ एवं पक्षकारों के लिए विधिक जागरूकता शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुंदरलाल खारोल ने मानसिक स्वास्थ्य के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि वर्तमान समय में प्रत्येक व्यक्ति का मानसिक एवं भावनात्मक रूप से स्वस्थ रहना अत्यंत आवश्यक है।
मानसिक स्वास्थ्य बेहतर जीवन की आधारशिला : खारोल
शिविर को संबोधित करते हुए न्यायाधीश सुंदरलाल खारोल ने कहा कि आधुनिक जीवनशैली और तकनीक पर बढ़ती निर्भरता के कारण लोगों के जीवन में अनेक बदलाव आए हैं। ऐसे में मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता देना आवश्यक हो गया है। उन्होंने कहा कि तनाव और चिंता आज आम समस्याएं बन चुकी हैं, जबकि अवसाद (डिप्रेशन) एक गंभीर मानसिक बीमारी है। नियमित व्यायाम, योग और ध्यान को अपनाकर मानसिक तनाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है तथा जीवन की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सकता है।
तनावग्रस्त व्यक्तियों को सहयोग देना समाज की जिम्मेदारी
शिविर में वरिष्ठ सिविल न्यायाधीश एवं अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट कमाक्षी मीणा ने कहा कि मानसिक रूप से स्वस्थ रहना प्रत्येक व्यक्ति के लिए आवश्यक है। उन्होंने कहा कि आज के दौर में विद्यार्थी, युवा और विभिन्न पेशों से जुड़े लोग तनाव के कारण कई बार गंभीर निर्णय लेने की स्थिति में पहुंच जाते हैं। ऐसे लोगों की समय रहते पहचान कर उन्हें भावनात्मक सहयोग और आवश्यक परामर्श उपलब्ध कराना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। जरूरत पड़ने पर मनोचिकित्सकों की सहायता लेने में संकोच नहीं करना चाहिए।
राष्ट्रीय लोक अदालत और मध्यस्थता की उपयोगिता पर दी जानकारी
कार्यक्रम के दौरान न्यायाधीश सुंदरलाल खारोल ने आगामी राष्ट्रीय लोक अदालत एवं मध्यस्थता अभियान की जानकारी देते हुए अधिवक्ताओं से अधिकाधिक प्रकरण मध्यस्थता के लिए भेजने का आह्वान किया। उन्होंने बताया कि मध्यस्थता और लोक अदालत विवादों के त्वरित, सरल एवं सौहार्दपूर्ण समाधान का प्रभावी माध्यम हैं, जिससे पक्षकारों को कम समय और कम खर्च में न्याय मिलता है। लोक अदालत में प्रकरणों के निस्तारण पर न्यायालय शुल्क भी वापस किया जाता है।
इस अवसर पर अधिवक्ता सुधीर कौशिक, दिनेश सिंह राठौड़ एवं दौलत सिंह ने भी मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता विषय पर अपने विचार व्यक्त किए। कार्यक्रम में अधिवक्ताओं एवं पक्षकारों ने बड़ी संख्या में भाग लेकर विधिक एवं सामाजिक विषयों की जानकारी प्राप्त की।