मारोठ(नागौर डेली न्यूज) : कस्बे के लीचाणा रोड स्थित निम्बार्क संप्रदाय के प्राचीन भादीपीठ मंदिर में गुरुवार को चादरपोशी कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान नवनियुक्त महंत त्रिलोक बिहारी शरण महाराज को विधिवत गद्दी पर विराजमान कराया गया। कार्यक्रम में जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्री श्यामशरण देवाचार्य के आगमन पर श्रद्धालुओं ने जयघोष के साथ पुष्पवर्षा कर भव्य स्वागत किया।
गौरतलब है कि भादीपीठाधीश्वर महंत रेवतीरमण दास महाराज का 27 अगस्त 2024 को जन्माष्टमी के अवसर पर जयपुर में आयोजित भजन संध्या कार्यक्रम के दौरान हृदयाघात से निधन हो गया था। इसके बाद वे जयपुर से मीठड़ी आए थे, जहां उन्होंने अंतिम सांस ली। संयोग से ठीक दो साल बाद 27 अगस्त को ही त्रिलोक बिहारी शरण महाराज को भादीपीठ की गद्दी पर विराजमान किया गया।
मंदिर परिसर में आयोजित चादरपोशी कार्यक्रम में संत-महंतों ने नवनियुक्त महंत को चादर ओढ़ाकर सम्मानित किया। इसके बाद रासमंडप परिसर में सर्वप्रथम खटीक समाज की ओर से चादर ओढ़ाई गई। इसके बाद क्षेत्रीय, ब्राह्मण, कुमावत सहित विभिन्न समाजों की ओर से चादर ओढ़ाकर भेंट अर्पित की गई। श्रद्धालुओं ने भी नवनियुक्त महंत एवं श्रीजी के दर्शन कर पूजा-अर्चना करते हुए भेंट अर्पित की।
‘हर घटना का दिन और समय निश्चित’
जगद्गुरु निम्बार्काचार्य श्री श्यामशरण देवाचार्य ने आशीर्वचन में कहा कि संसार में होने वाली प्रत्येक घटना का दिन और समय निश्चित होता है। यह भगवत कृपा ही है कि ठीक दो साल बाद आज त्रिलोक बिहारी शरण महाराज गद्दी पर विराजमान हुए हैं। उन्होंने कहा कि संतों की कृपा दुर्लभ होती है और यदि संतों का सान्निध्य मिल जाए तो भवसागर को सहज ही पार किया जा सकता है।
कार्यक्रम के दौरान नावां थाना प्रभारी सुरेश कुमार मय जाप्ते के मौजूद रहे। इस अवसर पर पलसाना महंत मनोहर शरण महाराज, बड़ा मंदिर रेनवाल के जुगलशरण महाराज, केरिया बालाजी के कृष्ण बिहारी शरण महाराज, पालड़ी के गोपाल दास महाराज, पुजारी हरिदास, बंशीवट बालाजी के पुजारी राम बाबा, गोविंद दास महाराज सहित बड़ी संख्या में संत-महंत, ग्रामीण एवं महिलाएं मौजूद रहीं।
कार्यक्रम में मीठड़ी कुमावत समाज अध्यक्ष रामेश्वर कुमावत, नंदकिशोर चावला, अशोक गौड़, नंदकिशोर गौड़, हेमाराम खटीक, बजरंग सोमानी, अम्बिकाशरण दाधीच, राजेंद्र सिंह चौहान, गजेंद्र सिंह, एडवोकेट राजकुमार सिंह, देवीसिंह सहित अन्य गणमान्य लोग उपस्थित रहे।