तेरापंथ की राजधानी में आचार्य महाश्रमण के जन्मोत्सव का भव्य आयोजन
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अबू बकर बल्खी | Sun, 26-Apr-2026 |
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लाडनूं(नागौर डेली न्यूज)। शनिवार को जैन विश्व भारती सुधर्मा सभा में आचार्य श्री महाश्रमण पधारे, जहां श्रावक-श्राविकाओं व मुख्यमुनिश्री सहित संत समुदाय ने अपने आराध्य के प्रति आध्यात्मिक मंगलकामना करते हुए विभिन्न प्रस्तुतियां दीं। साध्वी प्रमुखाजी, साध्वी वर्याजी ने आचार्य श्री की अभिवंदना करते हुए 65वें जन्मदिवस की मंगलकामना की। तदुपरान्त साध्वीवृंद ने भी गीत का संगान किया।
जैन विश्व भारती में स्थित महाप्रज्ञ प्रोग्रेसिव स्कूल के नन्हें विद्यार्थियों ने भी आचार्यश्री को वर्धापित किया। जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के छात्रों ने भी आचार्य श्री का अभिनंदन किया। आचार्यश्री महाश्रमण ने अपने जन्मोत्सव पर पाथेय प्रदान करते हुए कहा कि प्रश्न हो सकता है कि जन्म क्यों होता है? एक दिन में कितने बच्चों का तो कितने पशुओं का और भी कितने-कितने प्राणियों का जन्म होता होगा।
जन्म के संदर्भ में कहा गया है कि प्रमादी जीव बार-बार जन्म लेता है, गर्भ में आता है। मानव जीवन मिलना भी मानों महत्त्वपूर्ण है। मानव जन्म लिए बिना जन्म-मरण से मुक्ति नहीं मिल सकती, इसलिए मानव जन्म का अपना महत्त्व है। जन्म लेना भाग्य की बात होती है, लेकिन पुरुषार्थ करना अपने हाथ की बात होती है।
जैन विश्व भारती के मुख्य न्यासी जयंतीलाल सुराणा, जैन विश्व भारती मान्य विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. बच्छराज दूगड़, अमृतवाणी के अध्यक्ष ललितकुमार दूगड़, तेजकरण बोथरा, नरपत दूगड़, तेजकरण सुराणा, प्रभा दूगड़, योगक्षेम वर्ष प्रवास व्यवस्था समिति के महामंत्री निर्मल कोटेचा, संपतराज डागा, संजय खटेड़, राजेश दूगड़, निर्मल नौलखा, सूरजमल नाहटा ने अपनी अभिव्यक्ति दी।